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बेशर्म ससुर बहु की नंगी चुदाई

लखनऊ के राम लाल प्रसाद ने एक दिन अपनी बहु को गन्दा काम करते पकड़ लिया। उनका कहना है की उनकी बहु की वजह से घर में हर जगह चुत के रस की बदबू फैली रहती थी। घुसने में उन्होंने अपनी बहु को ही चोद डाला ताकि उसके अन्तर्वासना मीट पाए।


ससुर बहु की सेक्सी चुदाई

मैंने अपनी बहु को चोदा पर इसलिए नहीं क्यों की मुझे हवस छड़ी थी बल्कि इसलिए क्यों की उसकी चुत बात बात पर गीली हो जाती थी। साथियों मेरा नाम राम लाल प्रसाद और चलिए मेरी कहानी बेशर्म ससुर बहु की नंगी चुदाई शुरू करते है। 

मेरी ये सेक्सी कहानी तब घटी थी जब मैंने अपनी बहु को एक दिन मुठ मारते पकड़ लिया। उस वक्त मेरी उम्र 55 साल थी और मेरा बीटा 25 का था जिसकी शादी को 3 साल हो चुके थे। 

हम लखनऊ के एक छोटे इलाके में रहते थे। उस वक्त मुझे एक पोते की बड़ी इच्छा थी पर पता नहीं क्यों बेटा और बहु कोई बच्चा चाहते ही नहीं थे। 

मैं ये बात बहु से कर नहीं सकता था और बेटा कभी मुझे जवाब नहीं देता था। 

तो एक दिन मैंने सोचा की अब मुझे इसबारे में बहु से ही बात करनी चाहिए की आखिर मुझे तुम दोनों पोते के शक्ल कब दिखाओगे।

तो उस रात बेटा रोज की मजदूरी करने गया हुआ था और मेरी बीबी बाहर बैठी आग बाल रही थी। 

उस वक्त रात के 8 बज रही थे जब मैं छत वाले कमरे में अपनी बहु से बात करने गया। ऊपर गया तो बहु की चूड़ियों की खन खन मुझे सुनाई देने लगी। 

मैं जैसे जैसे सीढ़ियां चढ़ता गया वैसे वैसे मुझे बहु की सेक्सी आवाजे भी नही लगी। मैं कमरे के पास गया और खुदी से अंदर झाकने लगा। 

अंदर देखा तो पता लगा बहु कंबल में लिपटी हुई थी और आना हाथ जोर जोर से चला रही थी। वो कभी कंबल के अंदर देखते हुए अपना हाथ हिलाती तो कभी ऊपर घूमते पंखे को देखते हुए। 

उसे इस तरह मुट्ठी मारता देख मेरे अंदर दबे अश्लील सपने उमड़ पड़े और मैं ससुर बहु की नंगी चुदाई के सपने देखने लगा।  

पर उसे इस तरह देख मुझे इस उम्र में शर्म आ गई और मैं वहा से चला गया। 

आगे दिन मैं अपने वही सवाल लेकर बहु के कमरे में जाने लगा। पर उस दिन भी वो वही गंदे काम कर रही थी पर इस बार वो बिस्तर पर अपने दोनों पैर खोल अपने स्तन चूसते हुए मुठ मार रही थी। 

बहु का नंगा बदन देख मेरा सालो से लटका लिंग अपना सर उठा कर सलामी देने लग गया। अपना खड़ा लंड देख मैं हैरान हो गया। 

बहु को खुद को चोदता देख मैंने अपनी धोती में हाथ डाला और अपना लंड पकड़ कर हिलाने लगा। बहु के लटके स्तन और बड़ी बड़ी काली चूचियां और रास बहरी योनी देख मेरे लिंग से लार टपकने लगी और मेरी धोती लंड की तरफ से गीली होने लगी। 

दोस्तों मैं कोशिस करुगा की मेरी ये पारिवारिक सेक्स कहानी सरल भाषा में हो इसलिए आगे आपको कुछ समज न आए तो मुझे माफ़ कर देना। 

बहु अपने ही स्तन चूस चूस कर अपनी चुत को रगड़ती और चुदती रही और मैं आपका डंडा पकड़ कर हिलाता रहा जब तक उसमे से माल नहीं निकल गया। 

तो दोस्तों उस दिन तो मैंने मुठ मरी वो वहा से चला गया। 

पर तीसरे दिन जब मैं गया तो बहु ने कुछ नहीं किया। मैं आधे घंटे तक छत पर घुमता रहा और उसके कमरे में झांकता रहा पर उसने कुछ नहीं किया और ऐसा ही आगे एक हफ्ते तक रहा। 

मेरा बहु को नंगा देखने का काफी मन था पर वो कुछ कर ही नहीं रही थी। उस दौरान मैं रात को अपनी आंखे बंद करता और उसे नंगा कल्पना कर अपने लंड को हिलाने लग जाता। 

मेरी बहु तो बेशर्म थी ही साथ में मैं भी हो गया। एक हफ्ते बाद मुझे याद आया की जो बात मुझे बहु से करनी थी वो तो मैं कर ही नहीं पाया। 

मैं उस रात अचानक ऊपर गया तो देखा बहु फिर वही चुदाई चुदाई खेल रही है। मुझे मौका मिला तो मैं भी वही खड़ा मुठ मारने लगा। 

पर उस दिन बहु के कमरे में टीवी नहीं चला रखा था जिस वजह से उसे मेरे लंड हिलाने की आवाजे सुनाई देने लगी और उसकी नजर खिड़की पर पड़ गई। 

मुझे देख उसने जल्दी से अपने ऊपर चादर डाल ली और सर पर घूंघट लेकर चुप चाप वही बैठ गई। 

मैं उस वक्त अपना लंड पकड़ा और कमरे के अंदर उसे हिलाते हुए चला गया और बहु के सामने खड़ा हो गया। 

बहु के सामने मैं जोर जोर से मुट्ठी मारने लगा और बहु सर झुका पर बिस्तर पर बैठी रही। 

मैं धीरे से आगे बढ़ा और उसके घूंघट के अंदर अपना लंड डाल कर बोला ” चाल करले जो करना है !! “

ये सुनकर बहु ने कुछ नहीं किया और मेरे लंड के टोपे को देखती रही। 

मैंने फिर कहा ” करले किसी को पता नहीं चलेगा !! “

अब बहु ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरा लंड लकड़ कर हिलाने लगी और घूंघट के अंदर से ही उसे चूसने लगी। 

मैं आँखे बंद करके आनंद लेने लगा और बहु की नंगी चुत चोदू या न चोदू ये सोचने लगा। 

तभी बहु ने अपने मुँह की तेजी बढ़ा डाली और मेरे लंड को जोर जोर से चूसने लगी। ऐसा लग रहा था की ऐसे वो लंड देख कर ज्यादा कामुक हो गई हो।  

मैंने जल्दी से उसका सर पकड़ा और उसे रोक दिया ताकि मेरा बाल न निकल जाए। उसके बाद मैंने बहु के ऊपर से कंबल हटाया और उसकी चुत देख मेरे मुँह से पानी टपकने लगा 

बहु की चुत से काफी सारा पानी रिस रहा था जिसकी वजह से सारा बिस्तर गीला हो गया। 

बहु की गांड लसलसे पानी में लिपटी हुई थी जिको देख मैं अपना आप को रोक नहीं पाया और उसकी चुत में मुँह मारने लगा। 

बहु – अहंम अहह !! उफ्फफ्फ्फ़ !!!

अब उसके बाद मैं खड़ा हुआ और बहु को घोड़ी बने को कहा। बहु ने अपना घूंघट नहीं हटाया और वैसे ही घोड़ी बन गई। 

मैंने पीछे से अपने दोनों हाथ उसके ब्लाउज में डाले और उसके स्तन खींच कर बाहर लटका दिया और उसकी चूचियां दबाने लगा। 

दबाते दबाते मैंने अपना लंड उसकी छूट ने दाल दिया। 

चुत में लंड डालते ही बहु की चुत ने पानी छोड़ दिया। बहु काफी ज्यादा कामुक पहले से थी और ऊपर से मैंने अपना भरी लंड डाल दिया। लंड अंदर जाते ही बहु की चुत से पानी की तेज धार निकलपड़ी। 

उस वक्त मैं यही सोचने लगा की ये मूत था या कुछ और ?

खेर मेरा लंड खड़ा था और मेरी कामवासना अभी शांत नहीं हुई थी। मैं अपना लंड बहु की चुत के अंदर और बाहर करने लगा और आनंद लेने लगा। 

उस उम्र में मुझ से वो जवानी वाली चुदाई नहीं हो रही थी पर मैंने अपनी पूरी कोशिस की और बहु के लटकते स्तन दबा दबा और उसकी मोटी गांड पर अपनी बूढी कमरे से धके लगाने लगा। 

धके लगा लगा कर कमरे में चुदाई की तेज आवाज आने लगी और बहु भी तेज तेज सासे लेते लेते अपनी आवाज दबा कर घोड़ी बनी रही। 

बहु का रसीला और जवान शरीर देख मेरा कभी उसको चूसने का दिल करता तो कभी चोदने का। मैं कभी उसकी गांड में मुँह देकर उसे चाटता तो कभी अपना लंड डाल कर मजे से चुदाई करता। 

एक टांग पर खड़ी बहु को चोदा

कुछ देर बाद मैंने बहु को एक पैर पर खड़ा किया और दूसरा पैर अपने हाथ से उठा कर अपना लंड उसकी चुत में देने लगा।

खड़े खड़े बहु की चुदाई करते हुए मैं उसके स्तन चूसता तो कभी उसकी कोमल गर्दन और चूमता। 

चुदाई करते करते बहु अपनी आवाज दबाये राखी और मैं उसके शरीर और फ्री का माल समझ कर चोदता रहा। अहह अहह उठ बहु चिलाना चाहती थी पर कुछ नहीं बोली उसने अपना मुँह धीरे से आगे बढ़ाया और फिर मैंने उसके जवान होठो को चूमना शुरू कर दिया। बहु ने मेरे मुँह में अपना जुबान डाला और मैं उसे चुस्त हुआ अपनी कमर हिलता रहा। अपने कूल्हे हिला कर कभी मैं उसकी चुत चोदता तो कभी उसकी गांड का छेद अपनी उनलगी से। उसके बड़े गोल और नरम चूतड़ों को मैंने अपने हाथो से पदक हुआ था और उसकी नरम छाती मेरी छाती से रगड़ खा रही थी। मुझे चूमते हुए उसके शरीर पर रोंगटे खड़े हो गए और दोनों स्तन के निप्पल लाल होकर टाइट होने लगे। 

कुछ देर बाद मैं रुक गया पर बहु को पूरा जोश था वो अपने आप धीरे धीरे अपनी कमर आगे पीछे कर मेरे लिंग को अपने योनी के अंदर बाहर करने लगी।

अहह अहह अहह। बहु की नंगी चुदाई करते हुए मैं पसीने पसीने हो गया। मारा पतला बूढ़ा शरीर जवान रसीली औरत को घंटो तक चोदने की शमता नहीं रखता। पर फिर भी मैं बहु की छाती और होठो को चुस्त हाउ करि 1 घंटा चोदता रहा। बुढ़ापे में गोटिया लटक जाती है जो बहु हो चोदते हुए झूल कर बहु की नरम जांघो पर थपेड़े लगा रही थी।

अंडो की पिटाई से उनमे दर्द होने लगा और लाल हो गई। बहु के दूध चूस कर मेरा मुँह थक गया और गीले चुत चोद चोद कर दूसरी तरफ बहु एक टांग पर कड़ी चुदती हुई थक गई और चुत में दर्द होने लगा। उसका सारा रस भरा पानी धीरे धीरे निकल मेरी और उसकी जांघो से नीचे रिस रहा था। मैं बीच बीच में चोदता हुआ थोड़ी थोड़ी देर बाद नीचे बैठा और उसका भोसड़ा अपने मुँह में दबा कर सारा रस चूस लेता।

बहु – एक बात बोलू पापा जी ?

ससुर – हाँ के होया ?

बहु – आपका लड़का न मर्द है न मर्द !!

(बेटा नामर्द है ये सुनकर राम लाल को काफी दुःख हुआ। इस तरह वो कभी अपने पोते का मुँह नहीं देख पाएंगे। इसलिए घुसे में उन्होंने अपनी बहु को पागलो की तरह चोदना शुरू कर दिया। अपने बूढ़े पतले शरीर से वो बहु की मोटी जांघ उठा कर रसीली चुत में अपना लंड अंदर बाहर अंदर बाहर अंदर बाहर अंदर बाहर करते रहे। )

ये सुनकर मुझे गुस्सा आ गया और मैं बहु को जोर जोर से चोदने लगा और बहु मजे से आवाज निकालने लगी। 

चुदाई करते करते मैं समज गया की बच्चा न होने की क्या वजह है। 

मैं बहु का घुघट उठाया और उसे होठो पर चूमने लगा और अपना लंड का पानी उसके भोसड़े के अंदर छोड़ दिया। 

उसके बाद जो कुछ हुआ वो मजेदार नहीं है इसलिए मैं अपनी ये चुदाई कहानी यही ख़त्म कर रहा हूँ दोस्तों। मेरी देसी सेक्स कहानी बेशर्म ससुर बहु की नंगी चुदाई केसी लगी आप मुझे मेल कर के जरूर बताना। 

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4 Comments

    1. Aao tumko chodu tumhari chut ko thanda karu mera lund 9 inch ka hai bahut mota hai meri bibi ko jis din chodta hu chal nahi paati 5 saal se chhod raha hu use lekin abhi tak chal nahi paati uski chut aur gaand dono fad diya hu aao tumhare bhi faadu

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