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बस में सौतेले पापा के साथ चुदाई

चलती बस में पापा के साथ जबरदस्त चुदाई कर के मैंने उनके साथ एक अनोखा रिश्ता बनाया। मेरा नाम है रवीना और ये है मेरी कहानी बस में सौतेले पापा के साथ चुदाई। मेरी उम्र 24 है और मेरी ये कहानी आज से 1 साल पहले की है। Chudai ki Kahani शुरू करने से पहले मैं आप सभी को अपने शरीर की कामुकता के बारे में बता देती हूँ। 

मेरी ब्रा का साइज 34 DD और मेरी कमर छोटी है साथ ही बड़ी गांड भी। मेरे कॉलेज के लड़के बस मेरे पतली कमर और मटकती गांड ही देखते है। और अगर कोई मुझ से बात कर रहा हो तो बस मेरी बड़ी छाती से उनकी नजर ही नहीं हटती।  कुछ ऐसा ही मेरे पापा के साथ हुआ मेरी इस बाप बेटी की चुदाई कहानी में। 

मैं पढ़ाई लिखाई में बिलकुल अच्छी नहीं थी इसलिए मैं काफी बार फ़ैल हुई और मेरा स्कूल 23 साल की उम्र में खत्म हुआ। उसके बाद मैं कॉलेज गई जहा लड़को से मेरी काफी आशिक़ी चली। 

एक दिन जब मैं अपने दोस्तों बाहर घूमने गई थी तो रात ज्यादा हो गई और मुझे अकेले घर जाने में डर लगने लगा तो मैंने अपने सौतेले पापा को फ़ोन किया और कहा की वो मुझे यहाँ लेने आ जाए।

और वो लेने भी आ गए। घर जाते जाते हम एक खाली बस में स्वर थे। मैं पापा के साथ बैठी थी और आगे कंडक्टर और बस चलाने वाला बैठा था। 

हम दोनों बस के बीच में साथ बैठे थे। उसी वक्त एक जोर दार झटके से मैं उछाल कर पापा के ऊपर गिर पड़ी। मैं अपनी मोटी गांड पापा की जांघो पर रख बैठी और पापा ने मेरी पतली कमर पकड़ कर मुझे सहारा देदिया। 

उसी वक्त सौतेले पापा की नीयत गन्दी हो गई और वो मुझे चुदाई की नजरो से देखें लगे। मैं शर्मा कर नीचे देखने लगी और उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रगड़ कर कहा लगी तो नहीं ?

मुझे पता लग गया था की वो इस नीयत से मेरे कंधो को रगड़ रहे है इसलिए मैंने उनका हाथ पकड़ा और उसे उठा और उनकी जांघ पर रख दिया। 

जैसे ही मैंने उनका हाथ उनकी जांघ पर रखा मेरी नजर उनके मोटे टनटनाते लिंग पर गई। 

वो पापा की जांघो के बीच अलग सा ही दिख रहा था। सेक्सी लिंग देख कर मेरा मुँह वही बंद हो गया और मैं उसे मुस्कुरा कर देखती रही। 

अचानक मेरी चुत में खुजली हुई और मैं कामुक होने लगी। मेरा सौतेला बाप कभी अपने लंड को देखता तो कभी मेरी आँखों को। 

वो मेरी शर्माती आँखे और चिपकी जांघे देख समज गए की मैं कितने पानी में हूँ। 

उन्होंने धीरे से अपनी पैंट की जीप खोली और अपना खड़ा लंड बाहर निकाल कर मेरे समजे हिलाने लगे। 

खड़ा लंड देख मैं चौक गई और यहाँ वहा देखने लगी और सोचने लगी की करू तभी पापा ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर लपेट कर बोले ” क्या हुआ बेटा इतनी परेशांत क्यों हो रही है ? “

उन्होंने मेरा हाथ अपने लंड पर लपेटा और अपने लंड की खाल मेरे हाथ से ऊपर नीचे करने लगे। उनका लिंग काफी गर्म और सख्त था जिसकी गर्माहट से मैं भी गर्म हो रही थी।  

पापा ने थोड़ी देर मेरा हाथ पकड़ कर मुझ से अपना लंड हिलवाया और फिर मैं खुद उसे हिलाने लगी। लिंग पर उभरी बड़ी बड़ी नसों से मैं और कामुक हो रही थी। 

कुछ देर मैं ही मुझे ऐसा लगने लगा की मेरी कच्छी नीचे से गीली हो रही है तो मैं अपनी जाँघे आपस में रडने लगी। योनी के गीले होठ आपस में धीरे धीरे रगड़ने में मुझे मजा आने लगा। 

 तभी पापा ने मेरी जाँघे खोली और मेरी जीन्स के ऊपर से मेरी चुत सहलाने लगे। धीरे धीरे मैं कभू से बाहर होने लगी और मैंने बस में ही अपने सौतेले पापा का लंड चूसना शुरू कर दिया। 

दोस्तों बस यही क्सक्सक्स कहानी का मजेदार भाग शुरू होता है। मैं लंड चुस्ती रही और पापा मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह ऊपर नीचे करते रहे। 

उसके बाद मैंने अपनी जीन्स में हाथ डाल कर चुत में उनलगी करना शुरू कर दिया। मैं नीचे से काफी ज्यादा गीली हो रही थी। मैं रुकना तो चाहती थी पर मेरे हाथ रुक नहीं पा रहे थे। बार बार दिमाग में बस यही आ रहा था की थोड़ी देर और कर लेती हूँ। 

ऐसे करे करते मेरे सौतेले बाप ने मुझे अपनी जीन्स उतरने को कहा। आगे कंडक्टर सो गया था और बस वाला अपनी बस चला रहा था। 

मैंने आगे देखते हुए धीरे से अपनी जीन्स आधी उतारी और उनके लंड पर अपनी चुत रख कर नीचे बैठ गई। 

दोस्तों उनका खड़ा लंड जैसे ही मेरी गीली योनी में घुसा मैं तो कापने लगी। मेरी योनी के अंदर का रस धीर धीरे पापा के लंड से बहता हुआ उनकी जीन्स पर गिरने लगा। 

मैं डर डर कर आगे देखते हुए उनकी गोद में उछलती रही और अपने मुँह को अपने हाथ से दबोच कर रखी रही। 

पीछे से उन्होंने मेरी कमीज में हाथ गुसा कर मेरी ब्रा के अंदर हाथ डाल दिया। 

उस वक्त सर्दियों का टाइम था उनके हाथ काफी ठंडे थे और वो उन्ही हाथो से मेरे दोनों स्तन दबा रहे थे। 

गर्म लंड और ठंडे हाथो की वजह से मेरे शरीर पर रोंगटे खड़े हो गए और मैं पापा की गोद में उछलते हुए कापने लगी। 

थोड़ी देर बाद मेरे सौतेले बाप ने मुझे रोका और मुझे अपनी गोद में बिठा लिया।

कुछ देर मैं उनका खड़ा लंड चुत में लेकर वही बैठी रही और वो मेरी गर्दन पर चूमने लगे। 

दोस्तों वो पल मेरी जिंदगी का सबसे ज्यादा सेक्सी था। मुझे नहीं पता था की मुझ में इतनी हिमत होगी की मैं बस में सौतेले पापा के साथ चुदाई कर पाउगी। 

उसके बाद मेरे सब्र का बांध टूटा और मैं उनके लंड पर दोबारा कूदने लगी। कूदते हुए बस मेरा पानी निकलने ही वाला था की पापा ने अपनी गांड बस की सीट से नीचे लटकाई और अपनी कमर हिला हिला कर मेरी गांड पर जोर दार थपेड़े मारने लगी।

बस दोस्तों मैं तो पागल ही हो गई मेरा न तो अपने शरीर पर काबू था न तो दिमाग पर। चुदाई करते करते मेरी आँखों और चुत दोनों से पानी निकलने लगा।

उसके बाद एक दम से मेरी चुत से सफ़ेद गंदा पानी निकल गया और पापा की सारी कमर, पैंट और लंड मेरे चिपचिपे पानी से गन्दा हो गया। 

पर पापा ने अपनी कमर नहीं रोकी बल्कि वो मेरी चुदाई दुगनी तेजी से करने लगे जैसे ही हम ट्रैफिक जैम में जैसे। 

उन्हें पता था की ट्रैफिक के शोर में किसी को मेरी गांड पर पड़ने वाले थपेड़ो की आवाज नही आएगी। 

कुछ ही देर में पानी की फच फच आवाज आने लगी और मेरी चुत के रस की लम्बी लम्बी लार मेरी गांड और पापा की कमर के बीच बने लगी। 

अपनी निकलने के बाद भी मुझे अपनी चुत चुदवाने में काफी मजा आ रहा था। 

जैसे ही ट्रैफिक चल पड़ा वैसे ही मेरे पापा ने भी अपने लंड से माल निकाल दिया। 

और शांत हो गए। कुछ देर मैं उनके लंड पर अपनी नंगी गांड रख कर बैठी रही और हाफति रही फिर जैसे ही घर करीब आया मैंने अपने रुमाल से अपनी   

लसलसी गांड साफ की और पापा का लंड भी पोछ दिया। पापा मुझे देख मुस्कुराये और हम दोनों ख़ुशी ख़ुशी घर चले गए। 

तो दोस्तों ये थी मेरी Family Sex Story अगर आपको अच्छी लगी तो इस वेबसाइट पर दोबारा आना। 

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